फिर पूरी दुनिया को चौंकाया भारत ने, उठाया बेहद ताकतवर कदम

(Channelone/19.04.16) एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए भारत ने परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम के-4 मिसाइल को अरिहंत पनडुब्बी से लांच कर सफल परीक्षण किया। सबसे खास बात यह है कि के-4 मिसाइल और अरिहंत पनडुब्बी दोनों को स्वदेश में ही विकसित किया गया है। के-4 की रेंज 3,500 किलोमीटर है, साथ ही यह दो हजार किलोग्राम गोला-बारूद अपने साथ ले जाने में सक्षम है। बंगाल की खाड़ी में अज्ञात जगह से मिसाइल को लॉन्च किया गया।

के-4 मिसाइल का नाम पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है, जिसमें के-4 मिसाइल का कोड नेम है। मिसाइल की कामयाब लॉन्चिंग के साथ ही भारत पानी के भीतर मिसाइल दागने की ताकत रखने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है। इससे पहले ये तकनीक अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के ही पास थी। मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही भारत ने जमीन, हवा और पानी के भीतर से लंबी दूरी की न्यूक्लियर मिसाइल दागने की क्षमता विकसित कर ली है। के-4 बैलेस्टिक मिसाइल को पानी के भीतर 20 फीट नीचे से भी दागा जा सकता है।

आइएनएस अरिहंत पनडुब्बी को एक बार में चार के-4 मिसाइल से लैस किया जा सकता है।  के-4 मिसाइल को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी डीआरडीओ ने विकसित किया है। अब डीआरडीओ के सीरीज की तीन और मिसाइलों को विकसित करने पर काम कर रहा है। अगले कुछ साल में सेना, एयरफोर्स और नेवी को के-4 की सेवाएं हासिल हो सकेंगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि के-4 मिसाइल, अग्नि-3  मिसाइल के मुकाबले कई गुना बेहतर है, क्योंकि परमाणु सक्षम मिसाइल अग्नि-3 इस पनडुब्बी के लिए मुफीद नहीं है, जबकि के-4 मिसाइल को खास तौर पर आईएनएस अरिहंत पनडुब्बी के लिए ही विकसित किया गया है। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) ने इसे एक बड़ा कदम करार दिया है, लेकिन उनके मुताबिक जल्द ही अरिहंत को 5000 किलोमीटर से ज्यादा रेंज की अंतर प्राद्वीपीय मिसाइल (इंटर बैलेस्टिक मिसाइल) से लैस करने की जरूरत है, ताकि यह पनडुब्बी भारतीय समुद्र के किसी भी हिस्से में अपने लक्ष्य के लिए खतरा साबित हो सके।

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